" ऐ मौत "
जब भी तू आना,
दरवाजा न खटखटाना।
बस चुपके से आकर,
मुझे नींद से जगाकर
बताना,की अब हे जाना,
सच,न करूँगा कोई बहाना।
न वक्त लूंगा,कुछ समेंटने का।
कहि मुझे बाँध न ले,
डोर प्यार की,फिर से।
बस तेरा,इक इशारा पाकर,
चल दुंगा, धीरे से उठकर।
छोड़ जिंदगी के झमेले,
जाना तो होगा अकेले।
मुझे दर्द से न तड़पाना,
दर्द तो देता रहा हे,ये जमाना।
अपनों का दिल भी,न तू दुखाना,
उन्हें पहले,कुछ न जताना।
उनका उदास होना,
तड़पना और रोना,
हमे कैसे बर्दाश्त होगा,
फिर हमे सुकून,तेरे साथ भी न होगा..
तेरे साथ भी न होगा...

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