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Thursday, 19 December 2019

कुछ ऐसा खेल रचो साथी


कुछ ऐसा खेल रचो साथी
कुछ जीने का आनंद मिले
कुछ मरने का आनंद मिले

दुनियां के सूने आँगन में, कुछ ऐसा खेल रचो साथी

वह मरघट का सन्नाटा तो रह कर काटे जाता है
दुःख दर्द तबाही से दब कर मुफ़लिस का दिल चिल्लाता है
यह जूठा सन्नाटा टूटे
पापों का भरा घड़ा फूटे
तुम जंजीरो की झनझन में, कुछ ऐसा खेल रचो साथी

यह उपदेशों सर्चित रस तो फीका फीका लगता है
सुन धर्म कर्म की ये बातें दिल में अंगार सुलगता है
चाहे यह दुनियां जल जाये
मानव का रूप बदल जाये
तुम आज जवानी के क्षण में, कुछ ऐसा खेल रचो साथी

यह दुनियां सिर्फ सफलता का उत्साहित क्रीड़ा कलरव है
यह जीवन केवल जीतों का मोहक मतवाला है
तुम भी चेतो मेरे साथी
तुम भी जीतो मेरे साथी
संघर्षो के निष्ठुऱ रण में, कुछ ऐसा करो साथी 

जीवन की चंचल धारा में, जो धर्म बहे बह जाने दो
मरघट की रखों में लिपटी जो लाश रहे रह जाने दो
कुछ आंधी अंधड़ आने दो
कुछ और बबंडर लाने दो
नव जीवन में नव यौवन में, कुछ ऐसा खेल रचो साथी

जीवन तो वेसे सबका है,  तुम जीवन का श्रंगार बनो
इतिहास तुम्हारा राख बना, तुम राखों में अंगार बनो
अय्याश जवानी होती है
गठ वयस कहानी होती है
तुम अपने सहज लड़कपन में, कुछ ऐसा खेल रचो साथी

में..


कभी मुश्किल तो कभी आसान हुआ हूँ में
हर बार नए आगाज़ से परेशान हुआ हूँ में 

कभी इठलाया हूँ में ख्वाबो में ख्यालो में
कभी इस जिंदगी से इतना हैरान हुआ हूँ में

अपनोने जब से पहचानना छोड़ दिया है
अपने ही घर में कोई मेहमान हुआ हूँ में

कल तलक जो दिन और रात जो मेरे साथ थे
उन्हीं रिश्तों में कोई बोझ अंजान हुआ हूँ में

जरा सलीके से केहते तो उफ्फ़ तक न करू
जमाने के हर पत्थर का मुक़ाम हुआ हूँ में

भूल गए हे जब से वो अपनी मोहब्बत को 
गुजरे हुए वक़्त का आज निशान हुआ हूँ में

लोगों ने भी खूब बाते बनाई मेरी कहानी की
कुछ नही बस मोहब्बत में बदनाम हुआ हूँ में

मेरे दर्द का वजूद तुझको क्या समजाऊँ अब
ज़िंदा भी हूँ और खुद ही श्मशान हुआ हु में।।
https://youtu.be/50LE3jXVhf8

Wednesday, 18 December 2019

मुझे क्या पता


आसमां छू के आने की ज़िद्द है मुझे,
धूप है या घटा मुझे क्या पता।
मुझको अपनी उड़ानों से है वास्ता,
किस तरफ की हवा है मुझे क्या पता।

है ताल्लुक को टूटा तो टूटा रहे
मुझसे रूठा है कोई तो रूठा रहे,
इन दिनों में तो खुद से भी नाराज हूँ
कौन मुझसे खफा है मुझे क्या पता।

मुझको महबूब है आपकी हर अदा
बेवफ़ाई है क्या और क्या है वफ़ा,
जो भी समजइएगा समज लेंगे हम
आपके दिल में क्या है मुझे क्या पता।

तू मेरा रंग है तू मेरा रुप है
तू मेरी छाँव हे तू मेरी धूप हे,
तू जहां मिल गया हम वही रुक गए
घर है या रास्ता है मुझे क्या पता।

ख्वाहिशे भी नही हसरते भी नहीं
आरजू भी नही जुस्तजू भी नहीं,
ये जो दिल मेरे पहलू में आबाद है
किस मरज की दवा है मुझे क्या पता।

मुझसे मिलकर वो अंजुम कहां खो गया
लोग कहने लगे बेवफा हो गया,
ढूँढते फिर रहे हे हम जिसका पता
वो कहा लापता हे मुझे क्या पता।

Tuesday, 17 December 2019

मोहब्बत है तो है



                   वो नही मेरा मगर उस्से मोहब्बत है तो है,
                  ये अगर रस्मों, रिवाजों से बगावत है तो है।

             सच को मेने सच कहा, जब कह दिया तो कह दिया,
                 अब ज़माने की नजर में ये हिमाकत है तो है।

                    कब कहा मेने की वो मिल जाए मुजको,
             में उसे गर न हो जाए वो बस इतनी हसरत है तो है।

               चल गया परवाना तो शम्मा की इसमें क्या खता,
              रात भर जलना-जलाना उसकी किस्मत है तो है।

                    दोस्त बन कर दुश्मनों-सा सताता हे मुझे,
           फिर भी उस जालिम पे मरना अपनी फ़ितरत है तो है।

                   दूर थे और दूर हे हरदम जमीनों-आसमाँ,
                   दूरियों के बाद भी दोनों में कुर्बत है तो है।

ज़िन्दगी




कुछ दबी हुई ख्वाहिशे है
कुछ मंद मुस्कुराहटे
कुछ खोए हुए सपने है
कुछ अनसुनी आहटें
कुछ दर्द भरे लम्हें है
कुछ सुकून भरे लम्हात
कुछ थमे हुए तूफाँ है
कुछ मद्धम सी बरसात
कुछ अनकहे अल्फ़ाज है
कुछ नासमझ इशारे
कुछ उलझने हे रहो में
कुछ कोशिशे बेहिसाब
   बस इसी का नाम ज़िन्दगी है...

Tuesday, 10 December 2019

પરિચય છે મંદિરમાં દેવોને મારો


પરિચય છે મંદિરમાં દેવોને મારો,
અને મસ્જિદોમાં ખુદા ઓળખે છે.
નથી મારું વ્યક્તિત્વ છાનું કોઈથી,
તમારા પ્રતાપે બધા ઓળખે છે.

સુરા ને ખબર છે પિછાણે છે પ્યાલી,
અને ખુદ અતિથિ ઘટા ઓળખે છે.
ન કર ડોળ સાકી, અજાણ્યા થવાનો,
મને તારું સૌ મયકદા ઓળખે છે.

મેં લો'યાં છે પાલવમાં ધરતીનાં આંસુ,
કરુણાના તોરણ સજાવી રહ્યો છું.
ઊડી ગઈ છે નીંદર ગગન-સર્જકોની,
મને જ્યારથી તારલા ઓળખે છે.

અમે તો સમંદર ઉલેચ્યો છે પ્યારા,
નથી માત્ર છબછબિયાં કીધાં કિનારે.
મળી છે અમોને જગા મોતીઓમાં,
તમોને ફક્ત બદબુદા ઓળખે છે.

તબીબોને કહી દો કે માથું ન મારે,
દરદ સાથે સીધો પરિચય છે મારો.
હકીકતમાં હું એવો રોગી છું જેને,
બહુ સારી પેઠે દવા ઓળખે છે.

દિલે શૂન્ય એવા મેં જખ્મો સહ્યા છે,
કે સૌ પ્રેમીઓ મેળવે છે દિલાસો.
છું ધીરજનો મેરુ ખબર છે વફાને,
દયાનો છું સાગર ક્ષમા ઓળખે છે.

रंजिश

' तू आ... ' 

रंजिस ही सही दिल की 
दुखाने के लिए आ
कुछ तो मेरे पिंदार-ए-मोहब्बत
का भरम रख
तू भी तो कभी मुझ को
मनाने के लिए आ
पहले से मरासिम न सही
फिर भी कभीं तो
रस्म-ओ-रह-दुनिया ही
निभाने के लिए आ
किस किस को बताएंगे
जुदाई का सबब हम
तू मुझ से खफा हे तो
जमाने के लिए आ
इक उम्र से हूँ 
लज्जत-ए-गिर्या से भी महरूम
ऐ राहत-ए-जाँ मुझ को
रुलाने के लिए आ
अब तक दिल-ए-ख़ुश-फ़हम
को तुझसे हें उम्मीदें
ये आखरी शमएँ भी
बुझाने के लिए आ।

Saturday, 7 December 2019

रिश्ता

                           ' क्या है ये '

एक रिश्ता...

बेनाम सा...

ना हासिल...

ना जुदा...

ना खोया...

ना मिला...

फिर भी...

करीब सा...

मोहब्बत तो नही...

पर मोहब्बत सा...

जरूरत भी नही...

पर , जरूरी सा...

जाने...क्या है और कैसा शायद...

रिश्ता हे..

दूरी

                                      ' दूरी '

तेरे लिबास से मोहब्बत की हे,
तेरे एहसास से मोहब्बत की हे,
.
तू मेरे पास नही फ़िर भी,
मैने तेरी यादों से मोहब्बत की हे,
.
कभी तू ने भी मुझे याद किया होगा,
मैने उन लम्हों से मोहब्बत की हे,
.
जिन में हो सिर्फ तेरी और मेरी बातें,
मैंने उन अल्फ़ाज़ से मोहब्बत की हे,
.
जो महकते हो तेरी मोहब्बत से,
मैंने उन जज्बातों से मोहब्बत की हे,
.
तुझ से मिलना तो अब तक एक ख़्वाब लगता हे,
इसलिए मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की हे।

Wednesday, 4 December 2019

साँसे

 
                     'एक पल तुम आना'
 
     अगर रुकने लगे
           साँसे मेरी तो
       मेरे पास आ जाना..
      अपनी गौद में 
            रखकर सर मेरा 
        मुज़े सेहलाना..
            कुछ पल ही सही
       हम सारी तन्हाई की
दास्तान बयाँ कर देंगे,
        फिर मेरी कहानी सुनकर
   थोड़ा गुमसुम हो जाना..
          रोना मत वरना
    हमें भी रोना आ जायेगा
       बस एक बार मुस्कुरा कर
  प्यार से हमे सुला जाना।।

आखरी रस्म

'एक आखरी रस्म'

लाश हूँ में
अब दफना भी डालो
यही एक आखरी
रस्म बची हे उसे निभा भी डालो
ना होंगे हम फिर,
ना हमारी यादें..
वो सारे लम्हें
सारे मन्ज़र आज
मेरी कब्र में मिला भी डालो
मार तो दिया था
बहुत पहले ही
ज़िन्दगी ने हमको
आज मेरे सपने
मेरी ख्वाहिशें को भी
मेरे संग दफ़ना भी डालो
अब यही आखरी रस्म बची हे
उसे निभा डालो।।