हॉट,सेक्सी,मस्त,माल,बोम,जहर,आइटम,ऐसे कमेंट्स किसी महिला का मान नही बढ़ाते बल्कि ये आपकी परवरिश को प्रदशित करते हे।
जब कोई औरत बच्चे की पैदाईस के वक़्त दर्द से चीख रही होती हे,तड़प रही होती है तो मेरा दिल करता हे की में उसके पति को लाकर यहा खड़ा करू ताकि उसे पता चले की उसकी बीवी उसके वंश को आगे बढ़ाने के खातिर कैसे तड़प रही हे ताकि उसे बाद मे ये ना केह सके की "तुमने क्या किया हे मेरे लिए?" तुमने औलाद पैदा करके कोई अनोखा काम नही किया! कभी उसे घर से निकाल देने और तलाक की धमकी ना दे,एक पल में ना कह दे उसके माँ-बाप को की ले जाओ अपनी बेटी को!
लड़की पैदा होने पर नाक सिकोड़ने वाले लोग सुबह गली में कन्या ढूंढते हुए मिलते हे
काश की..एक पल में औरत को एक कोडी का कर देने वाले मर्द भी उस दर्द का अंदाज कर सके जो बीस हड्डियों के एक साथ टूटने के बराबर होता हे।
औरत क्या हे !
क्या है औरत ? हॉट हे, चोट हे, या सड़क पर गिरा नोट है?
अकेली दिखती हे तो ललचाती हे, बहलाती हे,बड़े बड़े योगियो को भमराती हे।
अपनी कोख से जनती हे पीर पैगम्बर,फिर भी पाप का द्वार कहलाती हे।
चुप रहना ही स्वीकार्य है, बोले तो मार दी जाती है। प्रेम और विश्वास गुण हे उसका, उनसे ही ठग ली जाती हे।
लोग केहते हे महफूज़ हे औरत घर की बंद दीवारो में.. फिर एक बात बताओ द्रोपदी कहाँ लूटी गयी थी घर में या बाजार में!
जिस को पाला निज वत्सल से, जिस छाती से जीवन सींचा, उस छाती के कारण ही वो उनकी नजरो में आती हे।
पुरुष घर देर आये तो औरत को फ़िक्र होती हे और अगर स्त्री घर
लेट पहुचे तो शक क्यों !
मेरा तन मेरा हे, केह दे तो मर्यादा का उल्लंघन हे और औरत ही विवाह समय दान में दे दी जाती हे ।
साहस भी हे, अहसास भी हे
ईश्वर की रचना ख़ास भी हे
अपमानित होकर क्यों फिर वो गालि में उतारी जाती हे।
औरत के जिस्म से निकलकर, औरत के पेट में पलकर, औरत की जवानी खाकर मर्द कहता हे.. ये औरत खराब हे।
मर्द कहते हे अकेली औरत महफूज़ नही हे- ये क्यों नही बताते किसकी वजह से !

