'एक आखरी रस्म'
लाश हूँ में
अब दफना भी डालो
यही एक आखरी
रस्म बची हे उसे निभा भी डालो
ना होंगे हम फिर,
ना हमारी यादें..
वो सारे लम्हें
सारे मन्ज़र आज
मेरी कब्र में मिला भी डालो
मार तो दिया था
बहुत पहले ही
ज़िन्दगी ने हमको
आज मेरे सपने
मेरी ख्वाहिशें को भी
मेरे संग दफ़ना भी डालो
अब यही आखरी रस्म बची हे
उसे निभा डालो।।

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