कलयुग का वर्णन
सुचना : सभी संस्कृत श्लोक का भावार्थ सीधा लिखा हे क्योंकि बिच-बिच में श्लोक पढ़ने से आपको पढ़ने में प्रोब्लेम होगी । 【कलयुग को कलियुग भी कहते हे】
कलयुग के पापों ने सब धर्मो का ग्रस लिया, सद्ग्रंथ लुप्त हो गए, दंभियो ने अपनी बुद्धि से कल्पना कर-करके बहुत पंथ प्रकट कर दिए।
कई हजार वर्ष पूर्व भागवत में शुकदेवजी ने जिस बारीकी से और विस्तार के साथ कलयुग का वर्णन किया है वह हमारी आँखे खोलने के लिए काफी है। आज उसी वर्णन अनुसार ही घटनाएं घट रही है और आगे भी जो लिखा हे वेसा ही घटेगा।
कलयुग यानी काला युग, कलह-क्लेश का युग, जिस युग में सभी के मन में असंतोष हो, सभी मानसिक रूप से दुःखी हो, वह युग ही कलयुग है । इस युग में धर्म का सिर्फ एक चैथाई अंश ही रह जाता हे। कलयुग का प्रारंभ 3120 ईसा पूर्व हुआ था। श्रीमद्भागवत पुराण और भविष्यपुराण में कलयुग के अंत का वर्णन मिलता हे। कलयुग में भगवान कल्कि का अवतार होगा, जो पापियों का संहार करके फिर से सतयुग की स्थापना करेंगे। कलयुग के अंत और कल्कि अवतार के संबंध में अन्य पुराणों में भी इसका वर्णन मिलता है।
कब होगा कलयुग का अंत :
मनुष्य का एक मास, पितरों का एक दिन रात। मनुष्य का एक वर्ष देवता का एक दिन रात। मनुष्य के 30 वर्ष देवता का एक मास। मनुष्य के 360 वर्ष देवता का एक वर्ष(दिव्य वर्ष)। मनुष्य के 432000 वर्ष। देवताओ के 1200 दिव्य वर्ष अर्थात् एक द्वापर युग।
मनुष्य के 1296000 वर्ष देवताओ के 3600 दिव्य वर्ष अर्थात् एक त्रेता युग। मनुष्य के 1728000 वर्ष अर्थात् देवताओ के 4800 दिव्य वर्ष अर्थात् एक 'सतयुग'। इस सबका कुल योग मानव के 4320000 वर्ष अर्थात् 12000 दिव्य वर्ष अर्थात् एक 'महायुग' या एक चतुर्युग चक्र।
इस मान से कलयुग का काल 4,32,000 साल लंबा चलेगा। अभी कलयुग का प्रथम चरण ही चल रहा। कलयुग प्रारंभ 3102 ईसा पूर्व से हुआ था,जब पांच ग्रह; मंगल,बुध,शुक्र,बृहस्पति और शनि, मेष राशि पर 0 डिग्री पर हो गए थे। इसका मतलब 3102+2016=5118 वर्ष कलयुग के बित चुके है और
426882 वर्ष अभी बाकि हे।
क्या होगा कलयुग के अंत में :
मनयुष्य की औसत आयु 20 वर्ष ही रह जाएगी: पांच वर्ष की उम्र में स्त्री गर्भवती हो जाया करेगी। 16 वर्ष में लोग वृद्ध हो जाएंगे और 20 वर्ष में मृत्यु को प्राप्त हो जाऐंगे। इंसान का शरीर घटकर बोना हो जाएगा। ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया हे की कलयुग में ऐसा समय भी आएगा जब इंसान की उम्र बहुत कम रह जाएगी, युवावस्था समाप्त हो जाएगी। कलि के प्रभाव से प्राणियो के शरीर छोटे-छोटे, क्ष्ीण और रोगग्रस्त होने लगेंगे।
ज्यों-ज्यों घोर, कलयुग आता जाएगा त्यों-त्यों उत्तरोतर धर्म, सत्य, पवित्रता, क्षमा, दया, आयु, बल और स्मरणशक्ति का लोप होता जाएगा।...अर्थात् लोगो की आयु भी कम होती जाएगी जब कलिकाल बढ़ता चला जाएगा।...कलयुग के अंत में...जिस समय कल्कि अवतार होंगे उस समय मनुष्य की परम् आयु केवल 20 या 30 वर्ष होगी। जिस समय कल्कि अवतार आएँगे।चारो वर्णों के लोग क्षुद्रो(बोने) के समान हो जाएंगे।गौएँ भी बकरियो की तरह छोटी छोटी और कम दूध देने वाली हो जाएगी।
क्या खाएगा मनुष्य :
कलयुग के अंत में संसार की ऐसी दशा होगी की अन्न नही उगेगा। लोग मछली-मास ही खाएंगे और भेड़ व बकरियो का दूध पिएंगे। गाय तो दिखना भी बंद हो जाएगी। होगी तो वह बकरी समान होगी। एक समय ऐसा आएगा, जब जमीन से अन्न उपजना बंद हो जाएगा। पेड़ो पर फल नही लगेंगे। धीरे-धीरे ये सारी चीजें विलुप्त हो जाएंगे। गाय दूध देना बंद क्र देगी।
कैसा मनुष्यों का स्वभाव :
स्त्रियां कठोर स्वभाव वाली व कड़वा बोलने वाली होंगी। वे पति की आज्ञा नही मानेगी। जिसके पास धन होगा उसी के पास स्त्रियां रहेगी। मनुष्यो का स्वभाव गधो जैसा दुस्सह, केवल गृहस्थी का भार ढोने वाला रह जाएगा। लोग विषयी हो जाएंगे। धर्म-कर्म का लोप हो जाएगा। मनुष्य उपरहित नास्तिक व चोर हो जाएंगे। सभी एक-दूसरे को लूटने में रहेंगे। कलयुग में समाज हिंसक हो जाएगा। जो लोग बलवान होंगे उनका ही राज चलेगा। मानवता नष्ट हो जाएगी। रिश्ते खत्म हो जाएंगे। एक भाई दूसरे भाई का ही शत्रु हो जाएगा। जुआ,शराब, परस्त्रिगमन और हिंसा ही धर्म होगा।
पुत्र, पिता का और पिता पुत्र का वध करके भी उद्दीग्न नही होंगे। अपनी प्रशंसा के लिए लोग बड़ी-बड़ी बाते बनाएंगे किन्तु समाज में उनकी निंदा नही होगी। उस समय सारा जगत म्लेच्छ हो जाएगा इसमें संशयम नही। एक हाथ दूसरे हाथ को लूटेगा।
कलयुग में लोग शास्त्रो से विमुख हो जाएंगे। अनैतिक साहित्य ही लोगो की पसंद हो जाएगा। बुरी बातें और बुरे शब्दों का ही व्यवहार किया जाएगा। स्त्री और पुरुष, दोनों ही अधर्मी हो जाऐंगे। स्त्रियां पतिव्रत धर्म का पालन करना बंद कर देगी और पुरुष भी ऐसा ही करेंगे। स्त्री और पुरुषों से संबंधित सभी वैदिक नियम विलुप्त हो जाएंगे।
कलयुग के अंत में क्यों होगा प्रलय -
महाप्रलय: बहुत काल तक सुखा रहने के बाद कलयुग में अंतिम समय में बहुत मोटी धारा से लगातार वर्षा होगी, जिससे चारो और पानी ही पानी हो जाएगा। समस्त पृथ्वी पर जल हो जाएगा और प्राणियो का अंत हो जाएगा।
इसके बाद एक साथ बारह सूर्य उदय होंगे और उनके तेज से पृथ्वी सूख जाएगी।
कलयुग के अंत में भयंकर तूफान और भूकंप ही चला करेंगे। लोग मकानों में नही रहेंगे। लोग गड्डे खोदकर रहेंगे। धरती का तिन हाथ अंश अर्थात् लगभग साढ़े चार फुट निचे तक धरती का उपजाऊ अंश नष्ट हो जाएगा। भूकंप आया करेंगे।
महाभारत में कलियुग के अंत में प्रलय होने का जिक्र हे, लेकिन यह किसी जल प्रलय से नही बल्कि धरती पर लगातार बढ़ रही गर्मी से होगा। सूर्य का तेज इतना बढ़ जाएगा कि सातो समुद्र और नदियां सूख जाएंगी। संवर्तक नाम की अग्नि धरती को पाताल तक भस्म क्र देगी। वर्षा पूरी तरग बंद हो जाएगी। सब कुछ जल जाएगा, इसके बाद फिर बारह वर्षो तक लगातार बारिश होगी। जिससे सारी धरती जलमग्न हो जाएगी। जल में फिर से जीव उत्तपति का शरुआत होगा।
मनुष्यों में वर्ण और आश्रम सबंधी प्रवृति नही होगी। वेदों का पालन कोई नही करेगा।विवाह को धर्म नही माना जाएगा। शिष्य गुरु के अधीन नही रहेंगे। पुत्र भी अपने धर्म का पालन नही करेंगे। कोई किसी कुल में पैदा ही क्यूं न हुआ जो बलवान होगा वही कलयुग में जो सबका स्वामी होगा। सभी वर्णों के लोग
कन्या बेचकर निर्वाह करेंगे। कलयुग में जो भी किसी का वचन होगा वही शास्त्र माना जाएगा। कलयुग में थोड़े से धन से मनुष्यो में बड़ा घमंंड होगा।
स्त्रीयो को अपने केशो पर ही रूपवती होने का गर्व होगा। कलयुग में स्त्रीया धनहीन पति को त्याग देंगी उस समय धनवान पुरुष ही स्त्रीयों का स्वामी होगा। जो अधिक देगा उसे ही मनुष्य अपना स्वामी मानेंगे। उस समय लोग प्रभुता के ही कारण सम्बन्ध रखेंगे। द्रव्यराशी घर बनाने में ही समाप्त हो जाएगी इससे दान-पुण्य के नाम नही होंगे और बुद्धि धन के संग्रह में ही लगी रहेगी। सारा धन उपभोग में ही समाप्त हो जाएगा। स्त्रीया अपनी इच्छा के अनुसार आचरण करेंगी हाव-भाव विलास में ही उनका मन लगा रहेगा। अन्याय से धन पैदा करने वाले पुरुषो में उनकी आसक्ति होगी। सब लोग सदा सबके लिए समाप्त का दावा करेंगे।
कलयुग की प्रजा बाड़ और सूखे के भय से व्याकुल रहेगी। सबके नेत्र आकाश की ओर लगे रहेंगे। वर्षा न होने से मनुष्य तपस्वी लोगो की तरह फल मूल व् पत्ते खाकर और कितने ही आत्मघात कर लेंगे।
कलयुग में सदा अकाल ही पड़ता रहेगा। सब लोग हमेशा किसी न किसी कलेशो से घिरे रहेंगे। किसी-किसी को तो थोड़ा सुख भी मिल जाएगा। सब लोग बिना स्नान करे ही भोजन करेंगे। देव पूजा अतिथि सत्कार श्राद्ध और तर्पण की क्रिया कोई नही करेगा। स्त्रियां लोभी,नाटी, अधिक खानेवाली और मंद भाग्य वाली होंगी। गुरुजनों और पति की आज्ञा का पालन नही करेंगी तथा परदे के भीतर भी नही रहेंगी। अपना ही पेट पालेंगी, क्रोध में भरी होंगी। देह शुधि की ओर ध्यान नही देंगी तथा असत्य और कटु वचन बोलेंगी। इतना ही नही, वे दुराचारी पुरुषो से मिलने की अभिलाषा करेंगी।
ब्रह्मचारी लोग वेदों में कहे गए व्रत का पालन किए बिना ही वेदाध्यापन करेंगे। गृहस्थ पुरुष न तो हवन करेंगे न ही सत्पात्र को उचित दान देंगे। वनो में रहने वाले वन के कंद-मूल आदि से निर्वाह न करके ग्रामीण आहार का संग्रह करेंगे और सन्यासी भी मित्र आदि के स्नेह बंधन में बंधे रहेंगे। राजा प्रजा की रक्षा न करके बल्कि कर के बहाने प्रजा के ही धन का अपहरण करेंगे। अधम मनुष्य संस्कारहीन होते हुए भी पाखंड का सहारा लेकर लोगो ठगने का काम करेंगे। उस समय पाखंड की अधिकता और अधर्म की वृद्धि होने से लोगो की आयु कम होती चली जाएगी।
उस समय पांच,छह अथवा सात वर्ष की स्त्री और आठ,नौ,या दस वर्ष के पुरुषो से ही संतान होने लगेंगी। घोर कलयुग आने पर मनुष्य बीस वर्ष तक भी जीवित नही रहेंगे। उस समय लोग मंदबुद्धि, व्यर्थ के चिन्ह धारण करने वाले बुरी सोच वाले होंगे।
लोग ऋण चुकाए बिना ही हड़प लेंगे तथा जिसका शास्त्र में कही विधान नही है ऐसे यज्ञो का अनुष्ठान होगा। मनुष्य अपने को ही पंड़ित समझेंगे और बिना प्रमाण के ही सब कार्य करेंगे।
तारों की ज्योति फीकी पड़ जाएगी, दसो दिशाए विपरीत होंगी।
पुत्र पिता को तथा बहुए सास को काम करने भेजेंगी। कलयुग में समय के साथ-साथ मनुष्य वर्तमान पर विश्वास करने वाले, शास्त्रज्ञान से रहित, दंभी और अज्ञानी होंगे। जब जगत के लोह सर्वभक्ष्ी हो जाए, स्वयं ही आत्मरक्षा के लिए विवश हो तथा राजा उनकी रक्षा करने मेंं असमर्थ हो जाएंगे तब मनुष्यो में क्रोध-लोभ की अधिकता हो जाएगी।
कलयुग के अंत के समय बड़े-बड़े भयंकर युद्ध होंगे, भारी वर्षा,प्रचंड आंधी और जोरों की गर्मी पड़ेगी। लोग खेती काट लेंगें, कपड़े चुरा लेंगे,पानी पिने का सामान और पेटियां भी चुरा ले जाएंगे। चोर अपने ही जैसे चोरो की संपति चुराने लगेंगे।
हत्यारो की भी हत्या होने लगेगी, चोरों से चोरों का नाश हो जाने के कारण जनता का कल्याण होगा। युगांतकाल में मनुष्यों की आयु अधिक से अधिक तीस वर्ष होगी। लोग दुर्बल, क्रोध-लोभ, तथा बुड़ापे और शोक से ग्रस्त होंगे। उस समय रोगों के कारण इन्द्रियां क्ष्ीण हो जाएंगी। फिर धीरे-धीरे लोग साधू पुरुषो की सेवा, दान, सत्य एवं प्राणियो की रक्षा में तत्पर होंगे।
इससे धर्म के एक चरण की स्थापना होगी। उस धर्म से लोगो को कल्याण की प्राप्ति होगी। लोगो के गुणों में परिवर्तन होगा और धर्म से लाभ होने का अनुमान होने लगेगा। फिर श्रेष्ठ क्या है, इस बात पर विचार करने से धर्म ही श्रेष्ठ दिखाई देगा।
जिस प्रकार कमशः धर्म की हानि हुई थी, उसी प्रकार धीरे-धीरे प्रजा धर्म की वृद्धि को प्राप्त होगी। इस प्रकार धर्म को पूर्णरूप से अपना लेने पर सब लोग सत्ययुग देखेंगे।