कुछ ऐसा खेल रचो साथी
कुछ जीने का आनंद मिले
कुछ मरने का आनंद मिले
दुनियां के सूने आँगन में, कुछ ऐसा खेल रचो साथी
वह मरघट का सन्नाटा तो रह कर काटे जाता है
दुःख दर्द तबाही से दब कर मुफ़लिस का दिल चिल्लाता है
यह जूठा सन्नाटा टूटे
पापों का भरा घड़ा फूटे
तुम जंजीरो की झनझन में, कुछ ऐसा खेल रचो साथी
यह उपदेशों सर्चित रस तो फीका फीका लगता है
सुन धर्म कर्म की ये बातें दिल में अंगार सुलगता है
चाहे यह दुनियां जल जाये
मानव का रूप बदल जाये
तुम आज जवानी के क्षण में, कुछ ऐसा खेल रचो साथी
यह दुनियां सिर्फ सफलता का उत्साहित क्रीड़ा कलरव है
यह जीवन केवल जीतों का मोहक मतवाला है
तुम भी चेतो मेरे साथी
तुम भी जीतो मेरे साथी
संघर्षो के निष्ठुऱ रण में, कुछ ऐसा करो साथी
जीवन की चंचल धारा में, जो धर्म बहे बह जाने दो
मरघट की रखों में लिपटी जो लाश रहे रह जाने दो
कुछ आंधी अंधड़ आने दो
कुछ और बबंडर लाने दो
नव जीवन में नव यौवन में, कुछ ऐसा खेल रचो साथी
जीवन तो वेसे सबका है, तुम जीवन का श्रंगार बनो
इतिहास तुम्हारा राख बना, तुम राखों में अंगार बनो
अय्याश जवानी होती है
गठ वयस कहानी होती है
तुम अपने सहज लड़कपन में, कुछ ऐसा खेल रचो साथी
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