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Monday, 13 January 2020

कोई अर्थ नही


नित जीवन के संघर्षो से
जब टूट चूका हो अन्तर्मन्,
तब सुख के मिले समन्दर का
रह जाता कोई अर्थ नही ।

                                 जब फसल सुख कर जल के बिन
                                 तिनका-तिनका बन गिर जाये,
                                 फिर होने वाली वर्षा का
                                 रह जाता कोई अर्थ नही  ।

सम्बन्ध कोई भी हो लेकिन
यदि दुःख में साथ न दे अपना,
फिर सुख में उन संबंधो का
रह जाता कोई अर्थ नही ।


छोटी-छोटी खुशियो के क्षण
निकले जाते है रोज जहाँ,
फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का
रह जाता कोई अर्थ नही ।

मन कटुवाणी से आहत हो
भीतर तक छलनी हो जाये,
फिर बाद कहे प्रिय वचनो का
रह जाता कोई अर्थ नही  ।

सुख-साधन चाहे जितने हो
पर काया रोगों का घर हो,
फिर उन अगनित सुविधाओं का
रह जाता कोई अर्थ नही ।


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