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Wednesday, 20 November 2019

कोई तुमसे पूछे


कोई तुमसे पूछे
कौन हूँ में ?
तुम कह देना
 कोई ख़ास नही...
 एक दोस्त हे
 पक्का कच्चा सा,
एक झूठ हे
 आधा सच्चा सा ।

जज़्बात से ढका
एक पर्दा हे,
एक बहाना
कोई अच्छा सा !

जीवन का ऐसा
साथी हे जो,
पास होकर भी
पास नही !

एक साथी जो
अनकही सी,
कुछ बातें
कह जाता है ।

यादों में जिसका
धुंधला सा,
एक चेहरा ही
रह जाता है ।

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ में
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं..

यूँ तो उसके
ना होने का,
मुझको कोई
ग़म नहीं,
पर कभी कभी
वो आँखों से,
आँसू बन के
बह जाता है ।

यूँ  रहता तो
मेरे ज़हन में है,
पर नजरो को
उसकी तलाश नही

साथ बनकर
जो रहता हे,
वो दर्द बाँटता
जाता है ।

भूलना तो चाहूँ
उसको पर,
वो यादों में
छा जाता है ।

अकेला महसूस
करूँ कभी जो,
सपनों में आ जाता है ।

में साथ खड़ा हूँ
सदा तुम्हारे,
कहकर साहस
दे जाता है ।

ऐसे ही रहता है
साथ मैरे की,
उसकी मौजूदगी का
आभास नही ।

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