कभी चलते चलते भटक गये
यूँही उम्र साडी गुजार दी
यूँही जिंदगी के सितम सहे
कभी नींद में कभी होंश में
तू जहां मिला तुजे देखकर
ना नजर मिली , ना जुबाँ हिली
यूँही सर झुका कर गुजर गये
मुझे याद हे कभी एक थे..
मगर आज हम हे जुदा जुदा
वो जुदा हुये तो संवर गये
हम जुदा हुये तो बिखर गये
कभी अर्श पर कभी फर्श पर
कभी उनके दर कभी दर बदर
ग़म-ए-आश्कि तेरा शुक्रिया
हम कहा कहा से गुज़र गये ..

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