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Wednesday, 18 December 2019

मुझे क्या पता


आसमां छू के आने की ज़िद्द है मुझे,
धूप है या घटा मुझे क्या पता।
मुझको अपनी उड़ानों से है वास्ता,
किस तरफ की हवा है मुझे क्या पता।

है ताल्लुक को टूटा तो टूटा रहे
मुझसे रूठा है कोई तो रूठा रहे,
इन दिनों में तो खुद से भी नाराज हूँ
कौन मुझसे खफा है मुझे क्या पता।

मुझको महबूब है आपकी हर अदा
बेवफ़ाई है क्या और क्या है वफ़ा,
जो भी समजइएगा समज लेंगे हम
आपके दिल में क्या है मुझे क्या पता।

तू मेरा रंग है तू मेरा रुप है
तू मेरी छाँव हे तू मेरी धूप हे,
तू जहां मिल गया हम वही रुक गए
घर है या रास्ता है मुझे क्या पता।

ख्वाहिशे भी नही हसरते भी नहीं
आरजू भी नही जुस्तजू भी नहीं,
ये जो दिल मेरे पहलू में आबाद है
किस मरज की दवा है मुझे क्या पता।

मुझसे मिलकर वो अंजुम कहां खो गया
लोग कहने लगे बेवफा हो गया,
ढूँढते फिर रहे हे हम जिसका पता
वो कहा लापता हे मुझे क्या पता।

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