कभी मुश्किल तो कभी आसान हुआ हूँ में
हर बार नए आगाज़ से परेशान हुआ हूँ में
कभी इठलाया हूँ में ख्वाबो में ख्यालो में
कभी इस जिंदगी से इतना हैरान हुआ हूँ में
अपनोने जब से पहचानना छोड़ दिया है
अपने ही घर में कोई मेहमान हुआ हूँ में
कल तलक जो दिन और रात जो मेरे साथ थे
उन्हीं रिश्तों में कोई बोझ अंजान हुआ हूँ में
जरा सलीके से केहते तो उफ्फ़ तक न करू
जमाने के हर पत्थर का मुक़ाम हुआ हूँ में
भूल गए हे जब से वो अपनी मोहब्बत को
गुजरे हुए वक़्त का आज निशान हुआ हूँ में
लोगों ने भी खूब बाते बनाई मेरी कहानी की
कुछ नही बस मोहब्बत में बदनाम हुआ हूँ में
मेरे दर्द का वजूद तुझको क्या समजाऊँ अब
ज़िंदा भी हूँ और खुद ही श्मशान हुआ हु में।।
https://youtu.be/50LE3jXVhf8

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